📍 Vijayant Khand, Gomti Nagar, Lucknow

ॐ योग संस्थान लखनऊ

"योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः"

Yoga is the cessation of the fluctuations of the mind.

— पतंजलि योगसूत्र १.२

हमारे बारे में जानें कार्यक्रम देखें संपर्क करें
2011
से सक्रिय
Active Since
5000+
शिष्य लाभान्वित
Seekers Guided
14+
वर्ष योग दिवस
Years of Yoga Day
3
कुंभ शिविर
Kumbh Camps
संस्था का परिचय · About

आध्यात्मिक साधना का केंद्र

ॐ योग संस्थान, विजयंत खंड-3, गोमतीनगर, लखनऊ में स्थित एक परोपकारी सनातनी धार्मिक संस्था है। पं. अरविंद पांडे जी द्वारा वर्ष 2012 में आरम्भ की गई यह संस्था 2017 से विधिवत पंजीकृत है।

संस्था नित्य प्रातः नीम उपवन पार्क में योग, गीता पाठ, भजन एवं आध्यात्मिक साधना का आयोजन करती है — निःशुल्क एवं निःस्वार्थ भाव से।

🧘
प्रतिदिन प्रातः नियमित योगाभ्यास — निःशुल्क
📖
नित्य श्रीमद्भगवद्गीता पाठ एवं श्लोक विवेचन
🪔
कुंभ, महाकुंभ एवं तीर्थाटन आयोजन
🕉️
सनातन धर्म का प्रचार — बिना किसी व्यावसायिक आकांक्षा के
और जानें हमारा उद्देश्य

आज का योगसूत्र · Sutra of the Day

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः

"Yoga is the cessation of the fluctuations of the mind."

— पतंजलि योगसूत्र १.२

गीता ज्ञान गोष्ठी के बारे में जानें →
मुख्य कार्यक्रम · Our Programmes

संस्था की प्रमुख गतिविधियाँ

🧘
नित्य योग

प्रतिदिन प्रातः नीम उपवन पार्क में नियमित योगाभ्यास — सभी के लिए निःशुल्क

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📖
गीता ज्ञान

नित्य श्रीमद्भगवद्गीता पाठ एवं क्रमानुसार श्लोक विवेचन — मासिक गोष्ठी

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🌞
योग दिवस

21 जून — अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य एवं सफल आयोजन 2015 से

और जानें →
🎭
रामलीला

विजयदशमी पर रामलीला मंचन — 9 वर्षों से निरंतर, भगवान राम के आदर्शों का प्रचार

और जानें →
🪔
कुंभ कल्पवास

प्रयागराज में कुंभ एवं महाकुंभ में मासीय कल्पवास शिविर — सरकार के सहयोग से

और जानें →
वेद वाणी · Sacred Wisdom

गीता एवं योगसूत्र के अमृत वचन

Words that guide our practice every day

योगः कर्मसु कौशलम्

"Yoga is excellence in action — performing every deed with full skill and awareness."

— श्रीमद्भगवद्गीता २.५०
तपस्विभ्योऽधिको योगी

"A yogi is greater than the ascetic, greater than the man of knowledge, and greater than the man of action."

— श्रीमद्भगवद्गीता ६.४६
सः तु दीर्घकाल नैरन्तर्य सत्कारासेवितो दृढभूमिः

"Practice becomes firmly grounded when well attended to for a long time, without break and in all earnestness."

— पतंजलि योगसूत्र १.१४

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

"You have a right to perform your prescribed duties, but you are not entitled to the fruits of your actions. Never consider yourself the cause of the results of your activities, and never be attached to not doing your duty."

— श्रीमद्भगवद्गीता २.४७

अपनी साधना आरम्भ करें

Begin your journey into authentic yogic tradition.

नीम उपवन पार्क, विजयंत खंड-3, गोमतीनगर, लखनऊ — प्रतिदिन प्रातः